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जनजातीय हित पूरी तरह सुरक्षित, ग्रेट निकोबार परियोजना में बढ़ेगा आरक्षित क्षेत्र…।

ब्यूरों रिपोर्ट,

नई दिल्ली/पोर्ट ब्लेयर: ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित ऐतिहासिक विकास परियोजना को लेकर फैली अफवाहों और चिंताओं के बीच सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जनजातीय समुदायों के हितों की पूरी सुरक्षा के साथ-साथ उनका आरक्षित क्षेत्र बढ़ेगा, घटेगा नहीं।

परियोजना के तहत कुल 166.10 वर्ग किमी भूमि का उपयोग प्रस्तावित है, जिसमें से 84.10 वर्ग किमी वर्तमान जनजातीय आरक्षित क्षेत्र में आता है। लेकिन सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इसमें से 11.032 वर्ग किमी भूमि तो 1972 से ही राजस्व उपयोग के अधीन है। यानी असल में सिर्फ 73.07 वर्ग किमी नई भूमि को परियोजना के लिए लिया जाएगा।

सबसे अच्छी खबर यह है कि इसके बदले 76.98 वर्ग किमी नई जमीन को जनजातीय आरक्षित क्षेत्र में जोड़ा जाएगा। नतीजतन, द्वीप पर मौजूदा 751.07 वर्ग किमी के जनजातीय आरक्षित क्षेत्र में नेट वृद्धि होगी। करीब 3.91 वर्ग किमी अतिरिक्त संरक्षण।

रणनीतिक महत्त्व वाली परियोजना…..!

यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एयरपोर्ट, टाउनशिप और पावर प्लांट समेत समग्र विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार का कहना है कि Shompen और Nicobarese जनजातियों का कोई विस्थापन नहीं होगा और उनके कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

पीआईबी के अनुसार, चरणबद्ध तरीके से परियोजना लागू की जाएगी, जिसमें पर्यावरणीय और जनजातीय सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन किया जाएगा।

क्यों खास है यह परियोजना?….

जनजातीय आरक्षित क्षेत्र घटने की बजाय बढ़ रहा है।

पुरानी राजस्व भूमि का उपयोग करके नए संरक्षण का वादा।

सामरिक दृष्टि से देश के लिए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट, जो भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूत बनाएगा।

यह विकास और संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण साबित हो सकता है, जहां विकास भी हो और जनजातीय विरासत भी सुरक्षित रहे।

जनजातीय कल्याण पहले……!
सरकार का यह फैसला उन आवाजों को जवाब देता है, जो परियोजना को जनजातीय हितों के खिलाफ बता रही थीं।

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