चुनावी सुधारों की मांग तेज, मोर्चा के ज्ञापन पर निर्वाचन आयोग को भेजा गया प्रस्ताव…!

ब्यूरों रिपोर्ट
विकासनगर।
चुनावी प्रक्रिया में सुधार और पूंजीपतियों के बढ़ते प्रभाव को लेकर जन संघर्ष मोर्चा की पहल अब आगे बढ़ती नजर आ रही है। मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएनवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड ने संज्ञान लेते हुए प्रस्ताव भारत निर्वाचन आयोग को भेज दिया है।
पूंजीपतियों के बढ़ते दखल पर रोक, मतदान आयु 21 वर्ष करने और चुनावी व्यवस्थाओं में बदलाव की उठी मांग।
नेगी ने कुछ दिन पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी वीबीआरसी पुरुषोत्तम से मुलाकात कर मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित ज्ञापन सौंपा था। इस क्रम में 25 मार्च 2026 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उक्त ज्ञापन को Election Commission of India को प्रेषित कर दिया।
ज्ञापन में नेगी ने आरोप लगाया कि बीते कुछ वर्षों में लोकसभा, विधानसभा तथा अन्य चुनावों में पूंजीपतियों का दखल लगातार बढ़ा है। आर्थिक रूप से सशक्त लोग अपने संसाधनों के बल पर जनप्रतिनिधि बन रहे हैं, जिससे समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति से लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
नेगी ने चुनाव के दौरान पोलिंग स्टेशनों के बाहर लगाए जाने वाले स्टॉल (बस्तों) पर भी सवाल उठाते हुए इन्हें अनावश्यक बताया। उनका कहना है कि जब प्रत्येक मतदाता तक मतदाता पर्ची घर-घर पहुंचाई जाती है और बीएलओ तैनात रहते हैं, तो ऐसे स्टॉल की आवश्यकता नहीं रह जाती।
इसके अतिरिक्त उन्होंने मतदान की न्यूनतम आयु 18 वर्ष से बढ़ाकर पुनः 21 वर्ष करने की मांग की। उनका तर्क है कि कम उम्र के मतदाताओं को चुनाव के दौरान नशे की ओर प्रेरित किया जा रहा है, जिससे युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। साथ ही चुनावी रैलियों में मोटरसाइकिल और स्कूटरों के अंधाधुंध उपयोग को भी उन्होंने युवाओं के लिए हानिकारक बताया।
नेगी ने कहा कि वर्तमान में चुनावों में धनबल का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए जनप्रतिनिधित्व मुश्किल होता जा रहा है। उनका आरोप है कि पूंजीपतियों का उद्देश्य चुनाव में लगाए गए धन को कई गुना बढ़ाना होता है, जिससे जनहित प्रभावित होता है।
उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त बनाए रखने के लिए समय रहते चुनावी प्रक्रिया में गुणात्मक सुधार किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
