नेटवर्क नहीं, मजदूरी नहीं, पहाड़ में डिजिटल सिस्टम फेल!

ब्यूरों रिपोर्ट
कालसी/देहरादून
देहरादून जिले के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र कालसी ब्लॉक में पिछले 18 दिनों से जारी धरना प्रदर्शन आज एक बड़े विरोध में बदल गया। 111 ग्राम पंचायतों के प्रधान और 40 क्षेत्र पंचायत सदस्य, ‘जी राम जी’ योजना में आ रही तकनीकी दिक्कतों से परेशान होकर आज कालसी ब्लॉक मुख्यालय पर ताला जड़ दिया।
क्या है पूरा मामला?….
जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि सरकार ने मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना को ‘जी राम जी’ में बदलकर पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कालसी और चकराता जैसे पहाड़ी इलाकों में आज भी नेटवर्क एक बड़ी समस्या बना हुआ है।
काम हो रहा है, हाजिरी नहीं लग रही….।
प्रधानों का कहना है कि पहले मनरेगा के तहत मजदूरों की हाजिरी ऑफलाइन लगती थी, जिससे काम भी सुचारू चलता था और भुगतान में कोई दिक्कत नहीं आती थी। लेकिन अब हर मजदूर की हाजिरी ऑनलाइन दर्ज करनी पड़ती है, वो भी दिन में दो बार।
और यही बन रही है सबसे बड़ी परेशानी…
कमजोर नेटवर्क के कारण…।
मजदूरों की हाजिरी दर्ज नहीं हो पा रही
दिनभर काम करने के बावजूद रिकॉर्ड में अनुपस्थित दिख रहे हैं
मजदूरी का भुगतान अटक रहा है।
मजदूर और प्रधान आमने-सामने……।
स्थिति अब इतनी बिगड़ चुकी है कि मजदूर, अपनी मजदूरी न मिलने पर सीधे प्रधानों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
“हमने काम किया है, पैसा दो” इस मांग के साथ ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है।
सरकार पर आरोप…..!
धरने पर बैठे जनप्रतिनिधियों का साफ कहना है कि उन्होंने कई बार अपनी समस्या सरकार तक पहुंचाई, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
उनका आरोप है कि प्रदेश की सरकार इस गंभीर समस्या पर “कान में तेल डालकर बैठी है”।
बड़ा सवाल…..!
क्या डिजिटल सिस्टम बिना बुनियादी सुविधाओं के लागू करना सही है?
क्या पहाड़ की हकीकत को नजरअंदाज किया जा रहा है?
कालसी ब्लॉक में लगा यह ताला सिर्फ एक इमारत पर नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जो जमीनी सच्चाई से कटती जा रही है।
यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि पहाड़ के उस दर्द की आवाज है। जहां नेटवर्क से बड़ी जरूरत है ‘सिस्टम के समझ’ की।



