लोकतंत्र का आईना.. सवाल ईवीएम का नहीं, ईमानदारी का है….!

ब्यूरों रिपोर्ट
कल पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर (दक्षिण 24 परगना) के फलता क्षेत्र में एक शर्मनाक घटना घटी। दूसरे चरण के मतदान के दौरान कई पोलिंग बूथों पर भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल वाले बटन पर सफेद टेप चिपका दिया गया। मतदाता उस बटन को दबा ही नहीं पाते। हरिंदंगा हाई स्कूल समेत बूथ नंबर 144, 189 आदि में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। अमित मालवीय ने इसे “डायमंड हार्बर मॉडल” नाम दिया। वही मॉडल जो अभिषेक बनर्जी के लोकसभा क्षेत्र में कथित तौर पर पहले भी देखा गया।
चुनाव आयोग के सीईओ ने कहा कि टेपिंग साबित होने पर उन बूथों पर रिपोलिंग होगी। मतदान कुछ बूथों पर रोक भी दिया गया। यह कोई साधारण गड़बड़ी नहीं थी। यह सीधा मतदाता के मौलिक अधिकार, स्वतंत्र और गोपनीय मतदान पर हमला था।
विपक्ष की चुप्पी का सन्नाटा….
2014 के बाद से भारत का विपक्ष EVM को लेकर जो नेरेटिव गढ़ता रहा, वह अब अपनी असली परीक्षा में फेल हो गया।
“EVM हैक हो जाता है!”
“EVM में चोरी होती है!”
“लोकतंत्र खतरे में है!”
ये नारे हर चुनाव में गूंजते रहे। कांग्रेस, TMC, लेफ्ट, AAP, सपा, बसपा सभी ने कभी न कभी EVM पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाएं दाखिल हुईं। VVPAT की मांग की गई। लेकिन जब असली घटना उनके अपने गढ़ में घटी, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर में तो इन तमाम “लोकतंत्र बचाओ” वाले नेताओं के मुंह में दही जम गया।
एक शब्द नहीं। एक बयान नहीं। कोई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं। कोई ट्वीट नहीं। कोई फेसबुक पोस्ट नहीं। जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
यह चुप्पी बोलती है कि उनका मुद्दा EVM नहीं, बल्कि सत्ता है। जब EVM उनके खिलाफ जाती दिखती है, तो वह “रिगिंग” है। जब उनके पक्ष में (या उनके गढ़ में) गड़बड़ी होती है, तो वह “प्रक्रिया” है।
सुविधा की राजनीति का खुलासा…
यह घटना केवल एक बूथ की नहीं है। यह चुनावी संस्कृति की बीमारी को उजागर करती है।
1- डबल स्टैंडर्ड: विपक्ष BJP को “दंगाई पार्टी”, “फासीवादी”, “लोकतंत्र का दुश्मन” बताता है। लेकिन पश्चिम बंगाल में जहां TMC कार्यकर्ताओं पर बूथ कैप्चरिंग, धमकियां, हिंसा और अब बटन कैप्चरिंग के आरोप लगते हैं, वहां चुप्पी साध ली जाती है।
2- सेक्युलर बुद्धिजीवियों की कुबुद्धि: जो हर भाजपा शासित राज्य में “असहिष्णुता” और “लोकतंत्र पर खतरा” देखते हैं, वे ममता के बंगाल में स्कूल-कॉलेजों में हिंसा, शिक्षक भर्ती घोटाला, सैंड माफिया, और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर हमलों को नजरअंदाज कर देते हैं। उनके लिए TMC की “धमकी वाली राजनीति” कोई मुद्दा नहीं।
3- जनता का भरोसा टूटना: देश की जनता अब समझ चुकी है। जब विपक्ष केवल सुविधा के हिसाब से लोकतंत्र का गला घोंटता है, तो वह विश्वसनीय नहीं रह जाता। 2014 से पहले के भ्रष्टाचार, घोटालों और परिवारवाद के खिलाफ जनता ने मोदी को चुना था। आज भी यही जनता देख रही है कि असली खतरा कहां से है। केंद्रीय सत्ता से या क्षेत्रीय तानाशाही से जो अपने गढ़ में कोई विरोध नहीं सहन करती।
तथ्य सामने हैं…
वीडियो सार्वजनिक हैं: बटन पर टेप, मतदाता और भाजपा प्रत्याशी देवांगशु पांडा का विरोध।
BJP ने रिपोल की मांग की, आयोग ने संज्ञान लिया।
डायमंड हार्बर अभिषेक बनर्जी का गढ़ है। यहां “मॉडल” पहले भी चर्चा में रहा, धमकियां, भय का माहौल।
TMC ने इन आरोपों को खारिज किया, लेकिन वीडियो गायब नहीं हो सकते।
लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नियम सबके लिए समान हों। EVM पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन चुनिंदा सवाल उठाना और अपने इलाके में गड़बड़ी को चुपचाप स्वीकार करना पाखंड है।
भारत की जनता अब समझदार हो चुकी है। वह सुविधा की राजनीति को पहचान चुकी है। जो विपक्ष EVM पर इतना शोर मचाता है, लेकिन जब उसके अपने लोग बटन पर टेप लगाते हैं तो आंखें मूंद लेता है। उस पर भरोसा करना मुश्किल है।
असली लोकतंत्र मतदाता की इच्छा का सम्मान है, न कि टेप से छिपाई गई इच्छा। बंगाल की यह घटना सिर्फ एक चेतावनी है। अगर विपक्ष अपनी दोहरी नीति नहीं बदलेगा, तो जनता उसे और ज्यादा समय तक “लोकतंत्र के रक्षक” का रोल नहीं देने वाली।
समय आ गया है सच्चे परीक्षण का। EVM पर विश्वास रखना है तो सब जगह रखो। वरना चुप्पी न साधो, बल्कि ईमानदारी से बोलो। जनता देख रही है। और अब वह सारी घटनाएं याद भी रखती है।


