राष्ट्रीय

संकल्प से संरचना तक: डेमोग्राफिक मिशन पर मोदी सरकार का बड़ा कदम।

ब्यूरों रिपोर्ट

नई दिल्ली।
15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देश के सामने “डेमोग्राफिक मिशन” का विज़न रखा था। प्रधानमंत्री ने तब कहा था कि बदलते जनसंख्या संतुलन, संसाधनों पर बढ़ते दबाव और भविष्य की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए भारत को दीर्घकालिक जनसंख्या नीति पर गंभीरता से काम करना होगा।

अब ठीक नौ महीने बाद, 26 मई 2026 को केंद्र सरकार ने उस संकल्प को संस्थागत रूप देते हुए “High Level Committee For Demographic Change” के गठन की घोषणा कर दी है। इसे मोदी सरकार के उस बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले दशकों के भारत की सामाजिक संरचना, संसाधन प्रबंधन और विकास मॉडल को दिशा देने का प्रयास करेगा।

सरकारी सूत्रों के अनुसार यह हाई लेवल कमेटी देश में तेजी से बदल रहे जनसंख्या पैटर्न, क्षेत्रीय असंतुलन, शहरीकरण, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और संसाधनों पर पड़ रहे प्रभावों का व्यापक अध्ययन करेगी। साथ ही यह समिति भविष्य की नीति निर्माण के लिए केंद्र सरकार को ठोस सुझाव भी देगी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाला देश होने के साथ-साथ कई राज्यों में घटती जन्मदर और कई क्षेत्रों में बढ़ते जनसंख्या दबाव जैसी दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में यह पहल केवल जनसंख्या नियंत्रण तक सीमित नहीं, बल्कि “संतुलित जनसांख्यिकीय विकास” की दिशा में एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति मानी जा रही है।

मोदी सरकार ने ‘डेमोग्राफिक मिशन’ को दिया संस्थागत ढांचा, हाई लेवल कमेटी का गठन।

राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। समर्थक इसे “भविष्य के भारत की तैयारी” बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इस मिशन के दायरे और उसके संभावित प्रभावों पर सवाल उठा सकता है।

फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि लाल किले से उठी “डेमोग्राफिक मिशन” की आवाज अब सरकारी फाइलों से निकलकर नीति और क्रियान्वयन के अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है।

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