उत्तराखंड में सगंध फसल क्रांति को मिलेगा नया आयाम, राज्य औषधीय पादप बोर्ड की उपाध्यक्ष ने किया PARDI का निरीक्षण।

ब्यूरों रिपोर्ट
देहरादून, 21 सितंबर 2026
राज्य औषधीय पादप बोर्ड उत्तराखंड की उपाध्यक्ष श्रीमती अनुराधा वालिया ने आज परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास संस्थान (PARDI), सेलाकुई का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान की आधुनिक इत्र एवं सुगन्ध प्रयोगशाला, सगन्ध फसल उत्कृष्टता केन्द्र (हाई-टेक नर्सरी), ऐरोमा गैलरी और सगन्ध प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया।
संस्थान के निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान ने उपाध्यक्ष का स्वागत करते हुए उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा सगन्ध फसलों की खेती के प्रसार हेतु संचालित विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड में उत्तराखंड महक क्रांति नीति-2026-36 लागू कर दी है। इस नीति के अंतर्गत 22,750 हेक्टेयर भूमि को लेमनग्रास, मिंट, सिनेमन, तिमूर और डेमस्क गुलाब जैसी सगन्ध फसलों से आच्छादित किया जाएगा, जिससे लगभग 91 हजार कृषक लाभान्वित होंगे।
नीति के तहत 07 ऐरोमा वैलियां और 06 सेटेलाइट सेंटर विकसित किए जाएंगे। साथ ही कृषिकरण, आसवन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग तथा गुणवत्ता प्रमाणीकरण पर 50 से 80 प्रतिशत तक अनुदान की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में 23 प्रजातियों के सुगन्धित तेल/फूलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य भी निर्धारित किया जा चुका है।
उपाध्यक्ष श्रीमती अनुराधा वालिया ने PARDI की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यह ऐरोमा सेक्टर में कार्य करने वाला देश का एकमात्र ऐसा संस्थान है, जो किसानों को एक ही छत के नीचे कृषिकरण, आसवन, गुणवत्ता प्रमाणीकरण और बाजार व्यवस्था उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने संस्थान के सतत विकास के लिए राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर PARDI के वैज्ञानिक डॉ. जफर, डॉ. ललित आदि भी उपस्थित रहे।



