मजदूर आंदोलन और भगत सिंह के विचार आज भी प्रासंगिक…..!

ब्यूरो रिपोर्ट
“जहां भी अन्याय, जुल्म और अनाचार है, उसके खिलाफ उठने वाली हर आवाज भगत सिंह है”
देहरादून,
शहीद-ए-आजम भगत सिंह के विचारों और मजदूर आंदोलनों के बीच संबंध को लेकर देहरादून में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अखिल भारत नागरिक परिषद के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय “मजदूर आंदोलन और शहीद-ए-आजम भगत सिंह” रहा। कार्यक्रम का आयोजन उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन द्वारा किया गया।
संगोष्ठी में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में यूपीसीएल एवं पिटकुल के प्रबंध निदेशक पी.सी. ध्यानी मुख्य अतिथि तथा यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ए.के. सिंह अति विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
भगत सिंह केवल क्रांतिकारी नहीं, विचारक भी थे…..!
मुख्य वक्ता शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि भगत सिंह केवल महान क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि मजदूरों, किसानों और शोषित वर्गों के अधिकारों के प्रखर विचारक भी थे। उनके क्रांतिकारी विचारों का महत्वपूर्ण पक्ष मजदूरों और किसानों को संगठित कर उन्हें सामाजिक एवं राजनीतिक परिवर्तन की शक्ति बनाना था।
उन्होंने कहा कि “जहां भी अन्याय, जुल्म और अनाचार है, उसके खिलाफ उठने वाली हर आवाज भगत सिंह है।” उनके विचार आज भी सामाजिक न्याय और अधिकारों के संघर्ष में प्रासंगिक हैं।
दुबे ने कहा कि भगत सिंह के लिए राजनीतिक स्वतंत्रता का अर्थ केवल सत्ता परिवर्तन नहीं था। वे आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता को भी राजनीतिक आजादी का अभिन्न हिस्सा मानते थे। उनके विचार में मजदूरों की छोटी-छोटी आर्थिक मांगों और अधिकारों के लिए होने वाले संघर्ष व्यापक सामाजिक और राजनीतिक चेतना का आधार बन सकते हैं।
असेंबली में बम फेंकने का उद्देश्य बताया…….!
मुख्य अतिथि पी.सी. ध्यानी ने कहा कि ब्रिटिश सरकार के ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल और पब्लिक सेफ्टी बिल जैसी नीतियों के विरोध में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका था। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य किसी व्यक्ति की हत्या करना नहीं, बल्कि ब्रिटिश शासन को मजदूरों और जनता के अधिकारों के दमन के खिलाफ चेतावनी देना था।
उन्होंने कहा कि भगत सिंह के विचारों को उनके समय की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के संदर्भ में समझना जरूरी है।
लाला लाजपत राय की मौत ने डाला गहरा प्रभाव……!
शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज और बाद में उनकी मृत्यु की घटना ने भगत सिंह और उनके साथियों को गहराई से प्रभावित किया। इसके बाद भगत सिंह और राजगुरु ने ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सॉन्डर्स की हत्या की और इसे लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने की कार्रवाई के रूप में देखा गया।
युवाओं, मजदूरों और किसानों को संगठित करने पर जोर….!
यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ए.के. सिंह ने कहा कि नौजवान भारत सभा का उद्देश्य युवाओं, मजदूरों और किसानों को संगठित करना तथा स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और शोषणमुक्त समाज के निर्माण के लिए संघर्ष करना था।
उन्होंने कहा कि भगत सिंह का मानना था कि किसानों और मजदूरों को राजनीतिक सत्ता में वास्तविक भागीदारी मिले बिना देश के पूर्ण विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।
“इंकलाब जिंदाबाद” आज भी संघर्ष का प्रतीक……!
संयुक्त मोर्चा के संयोजक इंसारूल हक ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में आज भी मजदूर आंदोलनों के बीच “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा संघर्ष और परिवर्तन की चेतना का प्रतीक बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि भगत सिंह के विचार में इंकलाब का अर्थ केवल हिंसक परिवर्तन नहीं था, बल्कि ऐसी सामाजिक व्यवस्था का निर्माण था, जिसमें शोषणकारी व्यवस्था समाप्त होकर न्यायपूर्ण समाज के निर्माण का रास्ता तैयार हो।
कवि अतुल शर्मा ने दी प्रस्तुति…….!
कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि अतुल शर्मा ने भगत सिंह के जीवन और विचारों पर अपनी प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भगत सिंह के विचारों और उनके संघर्ष की याद दिलाई।
संगोष्ठी में विद्युत विभाग से जुड़े अभियंता-अधिकारी, कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि तथा विभिन्न स्थानों से आए कर्मचारी और पदाधिकारी मौजूद रहे। सचिवालय संघ सहित अन्य कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यक्रम के अंत में उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि भगत सिंह के विचार आज भी मजदूरों, किसानों और मेहनतकश जनता के अधिकारों तथा सामाजिक-आर्थिक न्याय से जुड़े सवालों पर विमर्श के लिए प्रासंगिक हैं।



