सेवा विस्तार या सिस्टम पर असर? यूजेवीएनएल में एक पद, कई सवाल!

ब्यूरों रिपोर्ट
देहरादून। उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार सवाल निगम के डायरेक्टर (प्रोजेक्ट) सुरेश चन्द्र बलूनी के सेवा विस्तार और उनके कार्यकाल को लेकर उठ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, सुरेश चन्द्र बलूनी का सेवा विस्तार 31 जुलाई को समाप्त हो चुका था। लेकिन इसी दिन उनके दिल्ली में बैठकर विभागीय अधिकारियों की बैठक लेने की चर्चा निगम के भीतर तेज हो गई। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका था, तो क्या उसी दिन किसी अन्य अधिकारी को पदभार नहीं सौंपा जाना चाहिए था?
31 जुलाई को कार्यकाल समाप्त, फिर किस अधिकार से चली बैठक? यूजेवीएनएल में जवाबदेही पर सवाल।
बताया जा रहा है कि सुरेश चन्द्र बलूनी मूल रूप से करीब दो वर्ष पहले यूजेवीएनएल से सेवानिवृत्त हो चुके थे। इसके बाद राज्य सरकार द्वारा उन्हें दो बार सेवा विस्तार दिया गया। अब उनका दूसरा सेवा विस्तार भी समाप्त होने के बाद निगम के भीतर यह चर्चा तेज है कि वर्तमान में डायरेक्टर (प्रोजेक्ट) के पद पर अधिकारिक रूप से कौन कार्य कर रहा है।
ऊर्जा निगम के कर्मचारी संगठनों और अधिकारियों का कहना है कि लगातार सेवा विस्तार की व्यवस्था से विभाग के वरिष्ठ और योग्य अधिकारियों की पदोन्नति प्रभावित होती है। उनका तर्क है कि सेवानिवृत्ति के बाद बार-बार सेवा विस्तार देने की परंपरा से उन अधिकारियों के अवसर सीमित हो जाते हैं, जो वर्षों से उच्च पदों पर पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
निगम के गलियारों में अब कई सवाल गूंज रहे हैं। क्या सरकार एक बार फिर सुरेश चन्द्र बलूनी को सेवा विस्तार देने की तैयारी कर रही है? यदि नहीं, तो 31 जुलाई के बाद डायरेक्टर (प्रोजेक्ट) के पद की जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास है? और यदि कार्यकाल समाप्त हो चुका था, तो दिल्ली में हुई विभागीय बैठक किस अधिकार के तहत संचालित की गई?
सेवा विस्तार या सिस्टम पर असर? यूजेवीएनएल में एक पद, कई सवाल!
हालांकि, इस पूरे मामले में अभी तक सरकार या यूजेवीएनएल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में कर्मचारी और अधिकारी दोनों स्पष्ट जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
अब निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं। क्या सरकार सेवा विस्तार की परंपरा को आगे बढ़ाएगी, या फिर विभाग के भीतर पदोन्नति की राह देख रहे अधिकारियों को अवसर मिलेगा? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में साफ हो सकता है।
