आस्था, राजनीति और नियमों के बीच घिरा एक विवाह समारोह।

ब्यूरों रिपोर्ट
हरिद्वार के राजाजी टाइगर रिजर्व के रिजर्व फॉरेस्ट में कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे की शादी अब विवादों के केंद्र में आ गई है। मामला हरिद्वार रेंज स्थित सुरेश्वरी देवी मंदिर का है, जहां शादी के भव्य आयोजन की तैयारियों ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
मंत्री खजान दास बोले “पहले बता देते, तो कहीं और कर लेते आयोजन”
शनिवार को मंदिर परिसर में बड़े स्तर पर पंडाल, स्टेज, कूलर और जनरेटर जैसी व्यवस्थाएं की गई थीं। लेकिन जैसे ही परमिशन को लेकर सवाल उठे, राजाजी प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरा पंडाल और सामान हटवा दिया। इतना ही नहीं, मंदिर समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा भी दर्ज कर दिया गया।
रविवार को हालात बदले नजर आए। मंत्री खजान दास खुद मंदिर पहुंचे, जहां सीमित दायरे में उनके बेटे की शादी की रस्में पूरी की गईं। सिर्फ पूजा, फेरे और साधारण आयोजन के साथ।
“हमें नियमों की जानकारी नहीं दी गई” मंत्री का पक्ष
मंत्री खजान दास ने पूरे विवाद को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि वे वर्षों से सुरेश्वरी देवी मंदिर में आस्था रखते हैं। उनके अनुसार, बेटे के स्वास्थ्य में सुधार के बाद परिवार की इच्छा थी कि शादी मंदिर में ही हो।
उन्होंने दावा किया कि कुछ दिन पहले जब वे मंदिर आए थे, तब वन विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे और वन निदेशक ने मौखिक सहमति दी थी।
मंत्री ने कहा कि,
“अगर पहले ही साफ तौर पर बताया जाता कि इसके लिए औपचारिक अनुमति जरूरी है, तो हम कहीं और आयोजन कर लेते।”
मंदिर समिति की सफाई…
मंदिर समिति के महामंत्री आशीष मारवाड़ी ने भी आयोजन को लेकर सफाई दी। उनके मुताबिक यह कोई भव्य आयोजन नहीं था, बल्कि सिर्फ पूजा और भंडारे की योजना थी। उन्होंने कहा कि मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।
प्रशासन सख्त, अनुमति से इनकार…
दूसरी ओर, राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन अपने रुख पर कायम है। अधिकारियों ने साफ कहा कि इस तरह के आयोजन के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी।
विवाद के चलते रविवार सुबह पार्क के गेट भी बंद कर दिए गए, जिससे आम श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ी। हालांकि दोपहर बाद गेट फिर खोल दिए गए और श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी गई।
अब आगे क्या?…
मामला सिर्फ एक शादी का नहीं, बल्कि संवेदनशील वन क्षेत्र में नियमों के पालन, प्रशासनिक पारदर्शिता और राजनीतिक प्रभाव के बीच संतुलन का बन गया है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पूरे विवाद में जांच किस दिशा में जाती है और क्या भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए नियम और सख्त किए जाएंगे।



