राष्ट्रीय

JNU में 11 छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप से मचा हड़कंप।

ब्यूरों रिपोर्ट

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक प्रोफेसर के खिलाफ 11 छात्राओं की शिकायत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्राओं ने प्रोफेसर पर कथित तौर पर यौन उत्पीड़न, अश्लील एवं यौन संकेत वाले टिप्पणियां करने और कुछ मामलों में अतिरिक्त अंक देने के बदले यौन संबंध अथवा सेक्सुअल फेवर की मांग करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की जांच विश्वविद्यालय की Internal Complaints Committee (ICC) कर रही है।

कांग्रेस सांसद और प्रोफेसर बिमोल अकोइजाम पर गंभीर आरोप, ‘अतिरिक्त नंबर के बदले सेक्सुअल फेवर’ मांगने का दावा; ICC कर रही जांच।

मीडिया रिपोर्टों में आरोपी प्रोफेसर की पहचान आंगोमचा बिमोल अकोइजाम के रूप में की गई है। अकोइजाम जेएनयू के Centre for the Study of Social Systems में प्रोफेसर हैं और मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद भी हैं। जेएनयू की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें वर्तमान में प्रोफेसर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

मई में हुई Viva परीक्षा के बाद सामने आया मामला…..!

रिपोर्टों के मुताबिक मामले की शुरुआत मई 2026 के पहले सप्ताह में हुई Viva परीक्षा के दौरान कथित अनुचित और यौन संकेत वाले व्यवहार से हुई। इसके बाद एक छात्रा ने मई के दूसरे सप्ताह में छात्रों के एक अनौपचारिक WhatsApp ग्रुप में अपना अनुभव साझा किया।

बताया जाता है कि छात्रा के अनुभव सामने आने के बाद कई अन्य छात्राओं ने भी इसी तरह के अनुभव साझा किए। इसके बाद मामला विश्वविद्यालय की Internal Complaints Committee तक पहुंचा और मई में औपचारिक शिकायत दर्ज की गई। ICC ने शिकायतकर्ताओं को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया।

‘अच्छे नंबर चाहिए तो सेक्सुअल फेवर’ का आरोप….!

सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि प्रोफेसर ने कथित तौर पर छात्राओं को संकेत दिया कि यदि वे उनके यौन प्रस्ताव स्वीकार करती हैं तो उन्हें अतिरिक्त नंबर दिए जा सकते हैं।

Hindustan Times और NDTV ने सूत्रों/शिकायतों के हवाले से इस आरोप की रिपोर्ट की है। हालांकि, यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि यह शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोप हैं और अभी जांच के जरिए इनकी सत्यता निर्धारित होनी बाकी है।

घर पर बुलाने और अनुचित व्यवहार के भी आरोप….!

मामला केवल Viva तक सीमित नहीं बताया गया है। कुछ शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि प्रोफेसर ने छात्रों को जेएनयू परिसर स्थित अपने आवास पर बैठकों अथवा gatherings के लिए बुलाया, जहां कथित तौर पर अनुचित व्यवहार और यौन प्रस्ताव किए गए।

कुछ छात्राओं ने कक्षा के दौरान भी कथित तौर पर अश्लील अथवा यौन संकेत वाली टिप्पणियां किए जाने का आरोप लगाया है।

45 दिन की छुट्टी के बाद फिर गर्माया मामला…..!

शिकायत दर्ज होने के बाद जेएनयू में करीब 45 दिन का सेमेस्टर ब्रेक रहा। जुलाई के मध्य में कक्षाएं दोबारा शुरू होने के बाद छात्राओं के बीच मामला फिर चर्चा में आया। इसी दौरान और छात्राओं के सामने आने की बात भी रिपोर्टों में कही गई है।

ICC की जांच जारी, अभी निष्कर्ष नहीं….!

जेएनयू की Internal Complaints Committee ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है और शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। ICC ने मीडिया से इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है और इसे आंतरिक जांच का विषय बताया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भी अभी विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि लगाए गए आरोप सही साबित हो चुके हैं। मामला जांच के चरण में है और अंतिम निष्कर्ष ICC की जांच के बाद ही सामने आएगा।

मामले में राजनीतिक रंग भी चढ़ा…..!

आरोपी प्रोफेसर के कांग्रेस सांसद होने के कारण मामला विश्वविद्यालय की सीमा से बाहर निकलकर राजनीतिक विवाद का रूप भी ले चुका है। ABVP ने 9 सितंबर को जेएनयू में प्रदर्शन कर मामले की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच तथा कार्रवाई की मांग की। संगठन ने यह सवाल भी उठाया कि मई में शिकायतें सामने आने के बावजूद जांच में इतना समय क्यों लग रहा है।

हालांकि, राजनीतिक संगठनों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों और छात्राओं की मूल शिकायतों को अलग-अलग देखना जरूरी है। किसी राजनीतिक संगठन का आरोप स्वयं में आरोपों की पुष्टि नहीं करता।

सबसे बड़ा सवाल, जांच कितनी निष्पक्ष और समयबद्ध होगी?

इस पूरे प्रकरण में अब सबसे अहम सवाल यही है कि जेएनयू की ICC शिकायतों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कैसे पूरी करती है।

एक तरफ 11 छात्राओं की शिकायतें हैं, जिनमें अकादमिक मूल्यांकन और कथित यौन प्रस्ताव के बीच संबंध बनाए जाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। दूसरी तरफ आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायिक अथवा संस्थागत जांच में सिद्ध नहीं हुए हैं।

ऐसे में मामले की सच्चाई सामने लाने का सबसे उचित रास्ता यही है कि शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा, आरोपी का पक्ष और ICC की निष्पक्ष जांच, तीनों को समान महत्व दिया जाए।

फिलहाल निष्कर्ष एक ही है कि आरोप गंभीर हैं, जांच जारी है और अंतिम सत्य ICC की जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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