राष्ट्रीय

कश्मीर के नाम पर दुनिया को भाषण, लेकिन PoJK में अपनी ही जनता पर दमन।

ब्यूरों रिपोर्ट

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हालात विस्फोटक हो चुके हैं। जिस कश्मीर को लेकर पाकिस्तान दुनिया भर में मानवाधिकारों की दुहाई देता है, वहीं अब उसकी अपनी सुरक्षा एजेंसियां आम नागरिकों पर गोलियां बरसाती नजर आ रही हैं।

PoJK में पाकिस्तान के खिलाफ बगावत, अपनी ही जनता पर बरसी गोलियां, कब्जे वाले कश्मीर में भड़की जनक्रांति।

PoJK में लंबे समय से आर्थिक शोषण, राजनीतिक उपेक्षा, महंगाई, बिजली संकट और प्रतिनिधित्व के मुद्दों को लेकर लोगों में आक्रोश था। हालात तब और भड़क गए जब प्रशासन ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके विरोध में पूरे PoJK में बंद और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया।

रविवार को रावलाकोट, मुजफ्फराबाद और अन्य इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना, पुलिस और रेंजर्स ने बल प्रयोग किया, गोलीबारी की और पैलेट गनों का इस्तेमाल किया। इसके बाद पूरे क्षेत्र में हालात बेकाबू हो गए।

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इस हिंसा में दर्जनों लोगों की मौत हुई है और 190 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई स्थानीय स्रोतों का दावा है कि मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि मृतकों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। कुछ खुफिया आकलनों के अनुसार 19 बच्चों और 7 गर्भवती महिलाओं की भी मौत हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में गुस्सा और बढ़ गया है।

PoJK के कई शहरों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं, बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया है और अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं पर देशद्रोह जैसे मुकदमे दर्ज किए गए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने भी इस कार्रवाई पर चिंता जताई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो पाकिस्तान वर्षों से कश्मीरियों के अधिकारों की बात करता आया है, वही आज PoJK में अपनी ही जनता की आवाज को बंदूक के दम पर दबाने की कोशिश क्यों कर रहा है? कश्मीर के नाम पर राजनीति करने वाले पाकिस्तान के लिए अब PoJK का यह जनाक्रोश एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

PoJK की सड़कों पर गूंज रहा है एक ही सवाल — “हक मांगने पर गोलियां क्यों?”

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