बड़ी खबर: ऊर्जा निगमों में बड़ा एक्शन, संयुक्त संघर्ष मोर्चा की मांगों पर लगी मुहर!

ब्यूरों रिपोर्ट
देहरादून।
उत्तराखंड की ऊर्जा व्यवस्था में लंबे समय से चल रहे विवाद पर आखिरकार बड़ा फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami द्वारा ऊर्जा के तीनों निगमों में की गई हालिया कार्रवाई को अब संयुक्त संघर्ष मोर्चा की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
क्या था मामला?…..
उत्तराखण्ड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 21 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्पष्ट मांग रखी थी कि,
60 वर्ष की आयु के बाद दिए जा रहे सेवा विस्तार (Extension) को समाप्त किया जाए।
प्रभारी व्यवस्था खत्म कर स्थायी नियुक्तियां की जाएं।
विभागीय अधिकारियों के प्रमोशन का रास्ता खोला जाए।
मोर्चा का तर्क क्या था?…….
मोर्चा का कहना था कि,
एक्सटेंशन के कारण योग्य अधिकारियों को प्रमोशन नहीं मिल पा रहा।
कई कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही रिटायर हो रहे हैं।
इससे विभाग में असंतोष और औद्योगिक अशांति का खतरा बढ़ रहा है।
अब क्या हुआ?……..
मुख्यमंत्री धामी ने ऊर्जा के तीनों निगमों में शीर्ष स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए यह साफ संकेत दे दिया है कि,
लंबे समय से चली आ रही एक्सटेंशन की परंपरा पर अब रोक लगेगी।
सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जाएगी।
स्थायी नियुक्तियों की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।
क्यों है ये फैसला अहम?……..
यह कदम सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि हजारों कर्मचारियों की पदोन्नति और भविष्य से जुड़ा हुआ है।
इससे,
विभागीय मनोबल बढ़ेगा।
प्रमोशन के अवसर खुलेंगे।
ऊर्जा सेक्टर में स्थिरता आएगी।
ऊर्जा निगमों में हुआ यह एक्शन केवल सरकार का निर्णय नहीं, बल्कि कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही लड़ाई का परिणाम है। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने जिस मुद्दे को उठाया, आज वह सरकार की कार्रवाई में साफ नजर आ रहा है।
