उत्तराखंड

मौत बनकर खाई में समा गई एसयूवी, SDRF बनी जीवनदाता।

ब्यूरों रिपोर्ट

रुद्रप्रयाग।

केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर रविवार तड़के एक भीषण सड़क हादसे ने लोगों की सांसें थाम दीं। तिलवाड़ा पेट्रोल पंप के समीप एक एसयूवी अनियंत्रित होकर लगभग 60 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। खाई की गहराई और दुर्घटना की भयावहता को देखकर मौके पर मौजूद लोगों को किसी बड़े हादसे की आशंका सताने लगी, लेकिन समय रहते पहुंचे एसडीआरएफ जवानों ने साहस, सूझबूझ और पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए पांच लोगों की जान बचा ली।

केदारनाथ हाईवे पर 60 मीटर गहरी खाई में गिरी गाड़ी, साहसिक रेस्क्यू से पांच लोगों की बची जान।

जानकारी के अनुसार रविवार सुबह करीब 5:10 बजे जिला नियंत्रण कक्ष रुद्रप्रयाग को दुर्घटना की सूचना मिली। सूचना मिलते ही अगस्त्यमुनि से उपनिरीक्षक धर्मेंद्र पवार के नेतृत्व में एसडीआरएफ की टीम आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुई।

मौके पर पहुंचने पर पता चला कि वाहन संख्या UP16-DK-0856 (SUV 700) सड़क से लगभग 50 से 60 मीटर नीचे नदी किनारे दुर्घटनाग्रस्त अवस्था में पड़ा है। वाहन के परखच्चे उड़ चुके थे और उसमें सवार सभी लोग गंभीर रूप से घायल होकर मदद का इंतजार कर रहे थे।

दुर्गम और जोखिमभरे इलाके में एसडीआरएफ, जिला पुलिस तथा स्थानीय लोगों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। जवान रस्सियों के सहारे खड़ी ढलानों से नीचे उतरे और विषम परिस्थितियों के बीच घायलों तक पहुंचे। इसके बाद सभी घायलों को स्ट्रेचर और रस्सियों की मदद से सुरक्षित खाई से बाहर निकाला गया।

कई घंटों तक चले इस चुनौतीपूर्ण अभियान में एसडीआरएफ के जवानों ने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया। घायलों को प्राथमिक उपचार देने के बाद एम्बुलेंस से अस्पताल भेजा गया, जिससे उन्हें समय पर चिकित्सीय सहायता मिल सकी।

हादसे में घायल लोगों की पहचान प्रिंस सिंह (30) निवासी पलामू, झारखंड, सभीमा सिंह (28) निवासी पश्चिम बंगाल, सुजोन मुखर्जी (27) निवासी जलपाईगुड़ी, ऋजा मुखर्जी (30) निवासी जलपाईगुड़ी तथा चालक प्रदीप कुमार (35) निवासी औरैया, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि राहत दल कुछ देर और पहुंचता तो हादसा और गंभीर रूप ले सकता था। एसडीआरएफ की त्वरित कार्रवाई और सफल रेस्क्यू अभियान ने पांच परिवारों की खुशियां उजड़ने से बचा लीं।

एसडीआरएफ ने फिर साबित की अपनी उपयोगिता
उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा और दुर्घटनाओं के दौरान एसडीआरएफ लगातार लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है। तिलवाड़ा हादसे में भी जवानों ने जान जोखिम में डालकर पांच लोगों को सुरक्षित निकालते हुए अपनी दक्षता और समर्पण का परिचय दिया।

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