भाजपा का मास्टरस्ट्रोक: संघ की वैचारिक भूमि से उभरे दिनेश आर्य अब राज्यसभा का टिकट।
ब्यूरों रिपोर्ट
हल्द्वानी/देहरादून: भाजपा ने रविवार को उत्तराखंड की राज्यसभा सीट के लिए जो नाम घोषित किया, वह सिर्फ एक टिकट नहीं, बल्कि पार्टी की संगठनात्मक गहराई और सामाजिक संतुलन का प्रतीक बन गया है। अनुसूचित जाति के वरिष्ठ नेता, पूर्व नैनीताल जिलाध्यक्ष और दर्जा राज्यमंत्री दिनेश आर्य को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाकर भाजपा ने एक साथ कई संदेश दिए हैं।
दिनेश आर्य कोई रातोंरात उभरे चेहरे नहीं हैं। उनका सफर संघ की शाखाओं से शुरू होकर भाजपा के संगठन और फिर सरकार तक पहुँचा है। 1982 में लखीमपुर खीरी, 1983 में बरेली और 1996 में नागपुर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का तृतीय वर्ष शिक्षण प्राप्त करने वाले आर्य को अपने जिले का इकलौता स्वयंसेवक माना जाता रहा। 1985 में विद्यार्थी परिषद से राजनीति की शुरुआत की, फिर युवा मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा और जिला अध्यक्ष तक की जिम्मेदारियाँ संभालीं।
2007 से 2010 तक नैनीताल भाजपा के जिलाध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने जिले में पार्टी का मजबूत आधार खड़ा किया। 2017 से 2021 तक अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव और पंजाब प्रभारी के रूप में राष्ट्रीय भूमिका निभाई। 2021 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क अधिकारी बने और दिसंबर 2023 से राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में दर्जा राज्यमंत्री का दायित्व संभाल रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में नैनीताल सीट से टिकट की दावेदारी के बावजूद उन्हें मौका नहीं मिला। फिर भी उन्होंने नाराजगी नहीं दिखाई और पार्टी के लिए मैदान में डटे रहे। यही धैर्य और संगठन के प्रति समर्पण अब उन्हें राज्यसभा पहुँचाने जा रहा है।
परिवार और जमीनी जुड़ाव….!
हल्द्वानी निवासी दिनेश आर्य के पिता बची राम आर्य नगरपालिका के सभासद और महामंत्री रह चुके हैं। पत्नी बीना शैल शिक्षिका हैं और परिवार का एक बेटा है। संघ से जुड़े परिवार की पृष्ठभूमि ने उन्हें वैचारिक रूप से मजबूत बनाया। कार्यकर्ता उन्हें सौम्य, मिलनसार और गुटबाजी से दूर नेता मानते हैं।
नामांकन का समय और संदेश…!
यह नामांकन ऐसे समय में आया है जब हाल ही में हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद दलित मुद्दे पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया था। भाजपा ने अनुभवी दलित चेहरे को आगे बढ़ाकर स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी समावेशी है और जमीनी कार्यकर्ताओं का सम्मान करती है। राज्यसभा में पहले से OBC और ब्राह्मण चेहरे मौजूद हैं, अब अनुसूचित जाति का चेहरा भी जुड़ गया है।
नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। 16 अक्टूबर को होने वाले मतदान में भाजपा के 47 विधायकों के बल पर दिनेश आर्य का चयन लगभग तय माना जा रहा है।
संगठन से सरकार और अब संसद तक का सफर तय करते हुए दिनेश आर्य ने साबित कर दिया है कि धैर्य, वैचारिक प्रतिबद्धता और जमीनी काम का फल जरूर मिलता है। भाजपा के लिए यह सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि वैचारिक कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा संदेश है।
