जाम से दूर, प्रकृति के करीब: पर्यटकों की नई पसंद बन रहा चकराता…।

ब्यूरों रिपोर्ट
विक्रम सिंह, विकासनगर/चकराता
उत्तराखंड का शांत और सुरम्य पर्वतीय क्षेत्र चकराता अब तेजी से पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। शिमला, मनाली और मसूरी जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर बढ़ती भीड़ और घंटों लंबे जाम से परेशान पर्यटक अब चकराता का रुख कर रहे हैं। समुद्र तल से लगभग दो हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह हिल स्टेशन अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और अपेक्षाकृत कम ट्रैफिक के कारण पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। इसका सीधा लाभ स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा है।
देवदार के घने जंगलों, ठंडी हवाओं, बादलों से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं और मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों से सजा चकराता लंबे समय तक सीमित संख्या में पर्यटकों का ही गंतव्य रहा। इसकी एक प्रमुख वजह यह थी कि टाइगर फॉल, मोइला टॉप, बुधेर गुफाएं और चिलमीरी टॉप जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को कैंट क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता था। हालांकि बीते कुछ वर्षों में परिस्थितियां बदली हैं और अब यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
चकराता कैंट बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी रिपू दमन सिंह के अनुसार क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। पर्यटकों की बढ़ती आमद ने स्थानीय बाजारों में नई जान फूंक दी है।
स्थानीय उत्पादों की बिक्री में भी बड़ा इजाफा देखने को मिल रहा है। पहाड़ी राजमा, कुल्थी, पारंपरिक दालों और अन्य स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ी है। वहीं आड़ू, खुमानी और अन्य मौसमी फलों की बिक्री से ग्रामीणों की आय में भी वृद्धि हुई है। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।
होटल व्यवसायियों का कहना है कि हर वर्ष चकराता आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। होटल उद्योग को इसका लाभ मिल रहा है, लेकिन पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए सड़क, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उनका मानना है कि यदि सरकार आवश्यक आधारभूत ढांचे को मजबूत करे तो चकराता उत्तर भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
चकराता कैंट बोर्ड के नामित सदस्य अनिल चांदना के अनुसार अप्रैल से जून के बीच लगभग चार हजार वाहनों का पंजीकरण दर्ज किया गया है। अनुमान है कि केवल अप्रैल और मई माह में ही करीब बीस हजार पर्यटक चकराता पहुंचे। यह आंकड़ा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे पर्यटन का स्पष्ट संकेत है।
प्राकृतिक सौंदर्य, सुकून भरा वातावरण और स्थानीय संस्कृति की अनूठी झलक चकराता को अन्य पर्यटन स्थलों से अलग पहचान देती है। यही कारण है कि चकराता अब केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि पहाड़ की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला उभरता हुआ केंद्र बनता जा रहा है। यदि बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए तो आने वाले वर्षों में चकराता उत्तर भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शुमार हो सकता है।



