जौनसार-बावर में हक-हकूक की लड़ाई तेज।
ब्यूरों रिपोर्ट
विकासनगर/जौनसार-बावर
जौनसार-बावर क्षेत्र में अंग्रेजों के समय से चले आ रहे पारंपरिक हक-हकूक और बाजिव-उल-अर्ज के अधिकारों को लेकर अब बड़ा आंदोलन खड़ा होने जा रहा है। विकासनगर स्थित जौनसार भवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि इन अधिकारों की रक्षा के लिए पहले सरकार से मांग उठाई जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर नैनीताल हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी।
बाजिव-उल-अर्ज अधिकारों की रक्षा को बनी कोर कमेटी।
बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान में राजस्व एवं वन विभाग द्वारा उन पारंपरिक अधिकारों पर अतिक्रमण किया जा रहा है, जो वर्षों से जिल्द बंदोबस्त और बाजिव-उल-अर्ज में दर्ज हैं। वक्ताओं ने कहा कि ये अधिकार जौनसार-बावर की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से जुड़े हुए हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होने दिया जाएगा।
बैठक में वर्ष 1999 के उस ऐतिहासिक मुकदमे का भी उल्लेख किया गया, जिसमें जौनसार के चार लोगों… शरण सिंह गढोल, अमर सिंह माख्टी, महावीर सिंह लाछा और ईच्छला निवासी एक अन्य व्यक्ति ने सिविल कोर्ट देहरादून में वाद दायर कर बाजिव-उल-अर्ज की मान्यता के पक्ष में जीत हासिल की थी। उपस्थित लोगों ने कहा कि यह फैसला आज भी क्षेत्र के लोगों के अधिकारों का मजबूत आधार है।
बैठक में सर्वसम्मति से एक कोर कमेटी का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य हक-हकूक की लड़ाई को संगठित रूप से आगे बढ़ाना रहेगा।
कोर कमेटी कार्यकारिणी
अध्यक्ष
दिग्विजय सिंह चौहान, ग्राम लखवाड़
उपाध्यक्ष
श्याम दत्त जोशी, ग्राम मेहरावना
महासचिव
चतर सिंह तोमर, ग्राम समालटा
सह सचिव
आनंद सिंह चौहान, ग्राम शिर्बा
कोषाध्यक्ष
सरदार सिंह चौहान, ग्राम बिसोई उपलगांव
सह कोषाध्यक्ष
नरेंद्र सिंह चौहान, ग्राम बिजनू
वैधानिक सलाहकार
प्रताप सिंह पवार, ग्राम कंनबुआ (पूर्व वन संरक्षक)
संगठन मंत्री
अतर सिंह चौहान, ग्राम मैंऊडा
सह संगठन मंत्री
प्रताप सिंह चौहान, ग्राम हयोऊ
संरक्षण टीम
दौलत सिंह तोमर, ग्राम कुनावा
बुध सिंह तोमर, ग्राम कोरुवा
तुलसीराम शर्मा, ग्राम जिसोऊ
शूरवीर सिंह तोमर, ग्राम नगऊ
श्रीचंद तोमर, ग्राम नराया
परम सिंह चौहान, ग्राम कोंकणोई
गोविंद सिंह चौहान, ग्राम दसोऊ
बैठक के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एकजुट होकर जौनसार-बावर के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

