उत्तराखंड

15 साल की सेवा, 5700 रुपये वेतन! आखिर कब मिलेगा पंप ऑपरेटरों को उनका हक?

ब्यूरों रिपोर्ट

देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्थाओं को सुचारु रखने वाले पंप ऑपरेटरों की बदहाल स्थिति अब शासन के दरवाजे तक पहुंच गई है। जन संघर्ष मोर्चा ने सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता (एचओडी) सुभाष पांडे के समक्ष इन कर्मचारियों के कथित शोषण का मुद्दा उठाते हुए जल्द समाधान की मांग की है।

मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुख अभियंता से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि उत्तरकाशी, टिहरी समेत प्रदेश के कई पर्वतीय जनपदों में लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के तहत ठेकेदारी प्रथा के माध्यम से कार्यरत पंप ऑपरेटर पिछले 15 से 17 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें आज भी बेहद कम मेहनताना मिल रहा है।

रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि इन कर्मचारियों से लगभग 24 घंटे की जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन ईपीएफ और ईएसआई की कटौती के बाद उन्हें मात्र 5700 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने इसे श्रमिकों के साथ अन्याय और शोषण करार देते हुए कहा कि इतने वर्षों की सेवा के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।

नेगी ने सवाल उठाया कि आखिर इतने लंबे समय से चल रहे इस शोषण पर सरकार, शासन और जनप्रतिनिधि मौन क्यों हैं। उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों और सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप इन कर्मचारियों को उचित वेतन और अन्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने बेहतर भविष्य की उम्मीद में अपना जीवन इस व्यवस्था को समर्पित कर दिया, लेकिन ठेकेदारी प्रथा ने उनके सपनों को लगातार तोड़ा है।

प्रमुख अभियंता सुभाष पांडे ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।

मोर्चा ने उम्मीद जताई कि वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे पंप ऑपरेटरों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में हाजी असद, प्रवीण शर्मा ‘पिन्नी’ और ब्लॉक अध्यक्ष भीम सिंह बिष्ट सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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