अंतरराष्ट्रीय

भारत की उड़ान: 2038 का सपना और मोदी युग का आत्मविश्वास…।

ब्यूरों रिपोर्ट,

दुनिया की नज़र आज भारत पर है। EY की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि 2038 तक भारत अमेरिका को पछाड़कर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। वो भी क्रय शक्ति समता (PPP) के पैमाने पर। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि उस बदलाव की गूंज है जो पिछले एक दशक में देश ने देखा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सुधारों की ऐसी लकीर खींची, जिसने विकास को नई रफ़्तार दी। GST ने कर व्यवस्था को सरल बनाया, UPI ने दुनिया को डिजिटल लेन-देन का भारतीय मॉडल दिखाया। युवाओं की ऊर्जा, मध्यम वर्ग की बढ़ती ताक़त और मज़बूत घरेलू माँग ने मिलकर अर्थव्यवस्था को एक मजबूत इंजन में बदल दिया है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ भी मान रही हैं कि भारत की वृद्धि दर आने वाले वर्षों में 6% से ऊपर बनी रहेगी।

लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियाँ, ऊँचे टैरिफ़ और वैश्विक राजनीति भारत की राह में रोड़े अटका सकती हैं। यही कारण है कि कुछ लोग इस रिपोर्ट को “भारत से डरते अमेरिका” की कहानी बता रहे हैं। सच यह है कि यह डर नहीं, बल्कि भारत के उभार की सच्चाई है। दुनिया समझ रही है कि 21वीं सदी का नेतृत्व भारत के बिना संभव नहीं।

हमें याद रखना होगा कि 2038 का सपना अपने आप सच नहीं होगा। इसके लिए हमें शिक्षा, स्वास्थ्य, नवाचार और रोज़गार में निवेश बढ़ाना होगा। हमें अपनी नीतियों को सिर्फ़ आज नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखकर बनाना होगा।

आज जब दुनिया की निगाहें भारत पर हैं, तब यह सिर्फ़ आर्थिक ताक़त का सवाल नहीं है, यह उस आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और आत्मगौरव का सवाल है। EY की रिपोर्ट हमारे लिए चेतावनी भी है और अवसर भी। चेतावनी कि अगर हम ठहरे तो पिछड़ सकते हैं। अवसर कि अगर हम आगे बढ़े तो कोई हमें रोक नहीं सकता।

2038 की गिनती शुरू हो चुकी है। और इस दौड़ में भारत अब सिर्फ़ भागीदार नहीं, बल्कि विजेता बनने की तैयारी में है।

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