चकराता की वोटर लिस्ट में बड़ा खुलासा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चमन सिंह का नाम दो जगह दर्ज।

ब्यूरों रिपोर्ट
चकराता (देहरादून) उत्तराखंड में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के बीच चकराता विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
SIR के बीच चुनावी व्यवस्था पर उठे सवाल…
मतदाता सूची के अवलोकन में चमन सिंह पुत्र स्वर्गीय गुलाब सिंह का नाम दो अलग-अलग मतदान क्षेत्रों की सूची में दर्ज दिखाई देता है। पहली प्रविष्टि बृनाड़ बास्तील (भाग संख्या-15) में क्रम संख्या 408 पर है, जहां उनकी आयु 62 वर्ष, मकान संख्या 31 और EPIC नंबर JNC0585968 दर्ज है। दूसरी प्रविष्टि रायगी त्यूणी (भाग संख्या-13) में क्रम संख्या 316 पर है, जहां आयु 58 वर्ष, मकान संख्या 35 और EPIC नंबर YNW0734129 अंकित है।
यही तथ्य इस मामले को सामान्य त्रुटि से आगे ले जाता है। हालांकि, केवल मतदाता सूची के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दोनों प्रविष्टियां एक ही व्यक्ति की हैं या समान नाम और पिता के नाम वाले दो अलग-अलग व्यक्तियों की। इसकी पुष्टि केवल चुनाव आयोग की जांच और SIR प्रक्रिया के बाद ही संभव है।
मामले की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि चमन सिंह दो बार देहरादून जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं और उनके भाई प्रीतम सिंह चकराता से छह बार विधायक चुने जा चुके हैं। ऐसे में प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़े नाम का दो अलग-अलग मतदाता सूचियों में दिखाई देना स्वाभाविक रूप से चर्चा और सवालों का विषय बन गया है।
SIR की प्रासंगिकता फिर हुई साबित…..।
दरअसल, चुनाव आयोग का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान इसी तरह की संभावित विसंगतियों, डुप्लिकेट प्रविष्टियों और त्रुटियों को चिन्हित कर मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। चकराता का यह मामला इस बात का उदाहरण माना जा रहा है कि व्यापक सत्यापन प्रक्रिया क्यों आवश्यक है।
उठ रहे हैं कई सवाल…..।
यदि दोनों प्रविष्टियां एक ही व्यक्ति की हैं, तो यह मतदाता सूची में गंभीर त्रुटि मानी जाएगी। वहीं यदि दोनों अलग-अलग व्यक्ति हैं, तो समान नाम, समान पिता के नाम, लेकिन अलग आयु, अलग मकान संख्या और अलग EPIC नंबर की स्थिति का भी स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए। इन सभी पहलुओं की जांच चुनाव आयोग के स्तर पर होना आवश्यक है।
चुनाव आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग…….।
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि दोनों प्रविष्टियों का तथ्यात्मक सत्यापन कराया जाए। यदि यह डुप्लिकेट प्रविष्टि है तो नियमानुसार उसे हटाया जाए, और यदि दोनों अलग-अलग व्यक्ति हैं तो रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम या विवाद समाप्त हो सके।
लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव सटीक और त्रुटिरहित मतदाता सूची होती है। यदि सूची में किसी भी प्रकार की विसंगति सामने आती है, तो उसका निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को और मजबूत बनाता है। अब सभी की नजर चुनाव आयोग की जांच और उसके निष्कर्ष पर टिकी है।
