उत्तराखंड

जौनसार-बावर में न्याय या भेदभाव? त्यूनी को राहत, चकराता और कालसी क्यों उपेक्षित?…

ब्यूरों रिपोर्ट

क्या जौनसार-बावर में विकास और न्याय भी अब तहसील देखकर मिलेगा? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि उत्तराखंड सरकार की मंत्रिमंडल उप-समिति की 25 अप्रैल 2026 की बैठक में वर्ग-4 भूमि के विनियमितीकरण को लेकर जो सिफारिश की गई, उसने पूरे क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है।

बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार, तहसील त्यूनी (परगना जौनसार-बावर) में वर्ग-4 की भूमि पर काबिज पट्टेदारों और अन्य कब्जेदारों को वर्ष 2004 के सर्किल रेट पर एक वर्ष का अतिरिक्त अवसर देकर भूमि नियमित करने की सिफारिश की गई है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिर्फ त्यूनी ही क्यों?…

चकराता विधानसभा क्षेत्र की तीनों तहसीलें त्यूनी, चकराता और कालसी—जौनसार-बावर की एक ही सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक पहचान का हिस्सा हैं। तीनों क्षेत्रों में वर्ग-4 भूमि पर वर्षों पुराने कब्जे, अधूरे पट्टे और विनियमितीकरण की मांग जैसी समस्याएं लगभग समान हैं। फिर ऐसी कौन-सी विशेष परिस्थिति है, जिसके आधार पर केवल त्यूनी को राहत देने की सिफारिश की गई और चकराता व कालसी को इससे बाहर रखा गया?

यदि समस्याएं समान हैं तो समाधान अलग-अलग क्यों?…

यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि क्षेत्र के हजारों परिवारों के अधिकारों और समान अवसर से जुड़ा प्रश्न है। लोगों के मन में यह आशंका स्वाभाविक है कि कहीं सरकार एक ही विधानसभा क्षेत्र के भीतर अलग-अलग मापदंड तो नहीं अपना रही।

सरकार को इस पर स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब देना चाहिए।

1- त्यूनी तहसील को विशेष राहत देने का आधार क्या है?
2- चकराता और कालसी तहसीलों को इस प्रक्रिया से बाहर रखने के पीछे क्या तर्क है?
3- क्या सरकार भविष्य में पूरे जौनसार-बावर क्षेत्र के लिए वर्ग-4 भूमि विनियमितीकरण की समान नीति लागू करेगी?
4- यदि नहीं, तो इस भेदभाव का औचित्य क्या है?

जौनसार-बावर के लोगों की मांग किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि समान अधिकार और समान न्याय की है। यदि त्यूनी के लोगों को राहत मिल सकती है, तो उसी अधिकार के साथ चकराता और कालसी के निवासियों को भी यह अवसर मिलना चाहिए।

सरकार को यह समझना होगा कि जौनसार-बावर केवल नक्शे पर बंटी हुई तहसीलों का समूह नहीं, बल्कि साझा इतिहास, संस्कृति और संघर्षों से जुड़ा एक क्षेत्र है। इसलिए नीतियां भी पूरे क्षेत्र के लिए समान होनी चाहिए।

चुनिंदा राहत नहीं, समग्र न्याय चाहिए।

अब जौनसार-बावर के लोग केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति और बराबरी का अधिकार चाहते हैं।

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