उत्तराखंड

उत्तराखंड में दालचीनी खेती को मिलेगा नया आयाम।

ब्यूरों रिपोर्ट

देहरादून। परफ्यूमरी एंड एरोमैटिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (पीएआरडीआई), सेलाकुई में आयोजित दालचीनी (सिनेमन) पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शुक्रवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। सेमिनार में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और किसानों ने भाग लेकर दालचीनी उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्द्धन और निर्यात की संभावनाओं पर व्यापक मंथन किया।

श्रीलंका और इंडोनेशिया के विशेषज्ञों ने दी आधुनिक तकनीकों की जानकारी, किसानों को वैल्यू चेन से जोड़ने पर जोर।

सेमिनार के अंतिम दिन की शुरुआत संस्थान के भाऊवाला स्थित सैटेलाइट सेंटर में आयोजित डेमोस्ट्रेशन सत्र से हुई। इस दौरान श्रीलंका के विशेषज्ञ मुदिता जयतलिका और इंडोनेशिया के विशेषज्ञ सेटिआरी मरवान्तो ने दालचीनी के बीजों की बुवाई, छाल प्राप्त करने के लिए पेड़ों की वैज्ञानिक कटाई तथा छाल की क्यूरिंग प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन किया। चम्पावत, नैनीताल, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग से पहुंचे किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर खेती संबंधी तकनीकी जानकारियां प्राप्त कीं।

इसके बाद आयोजित तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए वैज्ञानिकों एवं औद्योगिक विशेषज्ञों ने दालचीनी की हार्वेस्टिंग तकनीक, मूल्य संवर्द्धन, खाद्य सुरक्षा मानकों, प्रसंस्करण तकनीकों तथा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी बढ़ती मांग पर विस्तृत व्याख्यान दिए।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रताप सिंह पंवार ने कहा कि दालचीनी केवल एक कृषि फसल नहीं, बल्कि किसानों और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निर्यात के माध्यम से इस क्षेत्र में व्यापक आर्थिक अवसर उपलब्ध हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जड़ी-बूटी सलाहकार समिति उत्तराखंड के उपाध्यक्ष बलबीर सिंह घुनियाल ने कहा कि यह सेमिनार वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और किसानों के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इसे राज्य सरकार की “उत्तराखंड महक क्रांति नीति 2026-36” के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में अहम कदम बताया।

विशिष्ट अतिथि यू-कास्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा कि फसल आधारित इस प्रकार के सेमिनार किसानों को नवीनतम तकनीकों और बाजार की आवश्यकताओं से जोड़ने में सहायक सिद्ध होंगे तथा राज्य में दालचीनी उत्पादन को नई दिशा देंगे।

दालचीनी बनेगी किसानों की आय का नया आधार, अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में उभरी खेती से निर्यात तक की संभावनाएं।

संस्थान के निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान ने देश-विदेश से आए विशेषज्ञों और किसानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेमिनार के दौरान प्राप्त सुझाव राज्य में दालचीनी के रकबे को बढ़ाने तथा किसानों को सीधे वैल्यू चेन से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होंगे।

समापन समारोह में उत्कृष्ट पोस्टर एवं शोध प्रस्तुतियों के लिए प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। दो दिवसीय तकनीकी सत्रों का सारांश वैज्ञानिक डॉ. जफर हैदर ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने संस्थान परिसर में तेजपात के पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

इस अवसर पर डॉ. ललित अग्रवाल, डॉ. अरविन्द कुमार, डॉ. गरिमा देवलाल, डॉ. निखिल, डॉ. अनिल, विकास कुमार सहित संस्थान के वैज्ञानिक, कार्मिक एवं बड़ी संख्या में दालचीनी उत्पादक किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पंकज बिजल्वाण ने किया।

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