उत्तराखंड

हरबर्टपुर में ‘अंधेरा राज’ करोड़ों के खेल के बीच बुझीं 40 स्ट्रीट लाइट।

ब्यूरों रिपोर्ट

हरबर्टपुर।
जिस नगर को रोशनी से जगमगाना था, वहां आज अंधेरा अपनी हुकूमत चला रहा है। हरबर्टपुर नगरपालिका एक बार फिर से सवालों के कटघरे में खड़ी है। जहां करोड़ों के खर्च के दावे हैं, लेकिन सवा करोड़ रुपये का बिजली बिल चुकाने के लिए पैसे नहीं है।

नतीजा…..यूपीसीएल ने 40 स्ट्रीट लाइट कनेक्शन काट दिए, और पूरा नगर अंधेरे में डूब गया।

रोशनी गई, डर आया…….।

कोर्ट रोड सहित कई प्रमुख इलाकों में रात होते ही सन्नाटा और अंधेरा छा जाता है।
गली-मोहल्लों में अब रोशनी नहीं, बल्कि डर चलता है।

इसके चलते चोरी, लूट और आपराधिक घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।

महिलाएं और बुजुर्ग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

आम जनता में गुस्सा उबाल मार रहा है।

“बकाया नहीं, तो बिजली नहीं” यूपीसीएल का सख्त संदेश…!

मार्च क्लोजिंग के चलते यूपीसीएल ने बकाया वसूली अभियान तेज किया और सख्त कार्रवाई करते हुए,

40 स्ट्रीट लाइट कनेक्शन काट दिए गए।

साफ संदेश….भुगतान नहीं, तो कोई राहत नहीं।

दूसरी तरफ घोटालों की लंबी फेहरिस्त…..!

नगरपालिका पहले से कई गंभीर आरोपों में घिरी हुई है।

कंडम (खराब) गाड़ी में डीजल दिखाकर भुगतान किया गया।

3 किमी दूरी को 41 किमी दिखाकर लाखों की बंदरबांट।

खरीददारी में भारी अनियमितता।

2 बीघा जमीन के बदले 5 बीघा का भुगतान।

सवाल सीधा है,
जब फर्जी खर्च के लिए पैसा है, तो जनता की रोशनी के लिए क्यों नहीं?

जिम्मेदार कौन?…..

क्या यह सिर्फ लापरवाही है?

या फिर सुनियोजित भ्रष्टाचार?

क्या जनप्रतिनिधि जवाब देंगे?

या ये मामला भी अंधेरे में ही दब जाएगा?

जनता का सब्र दे रहा जबाब…..!

स्थानीय लोगों का कहना है कि,

“टैक्स हम दें, अंधेरे में हम चलें, और घोटाले कोई और करे, ये नहीं चलेगा!”

सबसे बड़ा सवाल….!

अगर हालात ऐसे ही रहे, तो हरबर्टपुर की सड़कों पर ही नहीं, पूरी व्यवस्था पर अंधेरा छा जाएगा।

ग्राउंड से सच्चाई…..!

“ये जो अंधेरी गलियां आप देख रहे हैं, ये किसी गांव की नहीं बल्कि हरबर्टपुर नगरपालिका की हैं।”

जहां,
बिजली बिल भरने के लिए पैसा नहीं है,
लेकिन फर्जी भुगतान के लिए खजाना खुला है।

आज सिर्फ हरबर्टपुर ही अंधेरे में नहीं है,
बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सिस्टम की पारदर्शिता भी अंधेरे में है।

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