उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बार एसोसिएशन देहरादून के प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार भेंट।

ब्यूरों रिपोर्ट

देहरादून ।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में बार एसोसिएशन देहरादून के अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड सरकार के सफलतापूर्वक चार वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं दीं एवं राज्य के समग्र विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

प्रदेश में न्यायिक व्यवस्था सुदृढ़ करने हेतु सरकार के प्रयासों की सराहना।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से अधिवक्ताओं के हितों के संरक्षण, न्यायालय परिसरों में सुविधाओं के विस्तार एवं न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

नई आपराधिक संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा।

इस दौरान नई आपराधिक संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि नई संहिताओं के लागू होने से न्याय प्रणाली अधिक सुदृढ़, त्वरित एवं जनोन्मुखी बनेगी। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में अधिवक्ताओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था को प्रभावी बनाने में बार और बेंच के बीच समन्वय आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार न्यायिक अधोसंरचना के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। न्यायालय परिसरों का आधुनिकीकरण, डिजिटल सुविधाओं का विस्तार, ई-कोर्ट प्रणाली को बढ़ावा तथा न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल एवं पारदर्शी बनाने के लिए अनेक पहल की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं की सुविधा हेतु बार भवनों के निर्माण, पुस्तकालयों के सुदृढ़ीकरण तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

अधिवक्ताओं के हित में सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों पर आभार व्यक्त।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह भी कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत करने, न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने तथा आमजन को सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वस्त किया कि अधिवक्ताओं एवं बार संगठनों के सुझावों को प्राथमिकता के साथ लिया जाएगा तथा न्यायिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

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