“कंडम गाड़ी में डीजल, कागजों में किलोमीटर, हरबर्टपुर पालिका में भ्रष्टाचार का हाईवे!”

हरबर्टपुर नगर पालिका में बड़ा घोटाला उजागर, कंडम गाड़ी में डीजल, 3 किमी को 41 किमी दिखाकर लाखों की बंदरबांट..
ब्यूरों रिपोर्ट
विकासनगर/हरबर्टपुर।
हरबर्टपुर नगर पालिका एक बड़े वित्तीय घोटाले के आरोपों में घिर गई है। डीजल-पेट्रोल खरीद, लॉगबुक हेराफेरी और सामान की खरीद में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है और यह खुलासा किसी विपक्ष ने नहीं, बल्कि खुद एक सभासद की RTI से हुआ है।
घोटाले की परतें एक-एक कर खुलती सच्चाई….
कंडम गाड़ी में भी रोज भरा गया डीजल…
पालिका परिसर में सालों से खड़ी एक कबाड़ (कंडम) कूड़ा गाड़ी में भी रोजाना डीजल खपत दिखाकर भुगतान किया जाता रहा।
3 किमी की दूरी को 41 किमी दिखाया…..
हरबर्टपुर से ढकरानी की वास्तविक दूरी लगभग 3 किमी है, लेकिन लॉगबुक में इसे 41 किमी दर्ज कर लाखों का फर्जी बिल बनाया गया।
इसी तरह:
धर्मावाला: 81 किमी दिखाया।
देहरादून: 131 किमी दर्शाया।
लॉगबुक बनी ‘घोटाले की किताब’….
वाहनों की डेली लॉगबुक में जानबूझकर दूरी बढ़ाकर हर महीने लाखों रुपये का भुगतान किया गया।
खरीद में भी खुला खेल….
30 रुपये की दवा 3300 में!
डिकंपोजर (कीटनाशक) की 1 लीटर बोतल ₹3300 में खरीदी गई, जबकि बाजार में कीमत मात्र ₹30 के आसपास है।
35 रुपये के दस्ताने ₹245 में!….
सामान्य दस्ताने, जो बाजार में ₹35–50 के हैं, उन्हें ₹245–260 प्रति नग में खरीदा गया।
जमीन भुगतान में भी खेल…..
पीठ बाजार की जमीन के लिए प्रति बीघा ₹64,000 के हिसाब से अनुबंध हुआ, लेकिन दो बीघा के लिए ₹3.52 लाख का भुगतान दर्शाया गया। यानी दोगुने से भी ज्यादा रकम!
RTI से खुला पूरा मामला…..
इस पूरे घोटाले का खुलासा सभासद विनोद कश्यप द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है।
बड़ा सवाल, जिम्मेदार कौन?….
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि,
क्या यह सब बिना नगरपालिका अध्यक्ष की जानकारी के संभव है?
क्या वर्षों से चल रहा यह खेल प्रशासन और सत्ता की मिलीभगत का नतीजा है?
अगर यह घोटाला सच है, तो यह सीधे-सीधे जनता के टैक्स की लूट है।
क्या भाजपा सरकार लेगी एक्शन?….
उत्तराखंड में भाजपा सरकार भ्रष्टाचार पर “जीरो टॉलरेंस” की बात करती रही है। लेकिन अगर भाजपा शासित निकाय में ही ऐसे घोटाले सामने आएं, तो सवाल उठना लाज़मी है।
क्या सरकार निष्पक्ष जांच कराएगी?
क्या जिम्मेदारों पर FIR दर्ज होगी?
या फिर मामला दबा दिया जाएगा?
जनता की मांग…..
इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच (SIT/विजिलेंस) हो।
दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
और नगरपालिका की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाया जाए।