उत्तराखंड

“जनसारी से जौनसारी” संशोधन की राह आसान, हाईकोर्ट में पीआईएल के बाद केंद्र ने शुरू की प्रक्रिया।

ब्यूरों रिपोर्ट

देहरादून/चकराता।

जौनसार-बावर की पहचान और सम्मान से जुड़ा एक अहम मुद्दा अब समाधान की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से सरकारी अभिलेखों में “जनसारी” शब्द की त्रुटि के कारण जौनसारी जनजाति के युवाओं को आरक्षण और रोजगार में कई तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

अब माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल में दायर जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के साथ ही इस त्रुटि को सुधारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारत सरकार ने पिछली सुनवाई में अदालत को बताया था कि जैसे ही राज्य सरकार की ओर से औपचारिक प्रस्ताव प्राप्त होगा, “जनसारी” के स्थान पर “जौनसारी” शब्द संशोधन की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

इस दिशा में अब महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तराखंड कैबिनेट ने संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके बाद केंद्र सरकार के स्तर पर संशोधन की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इसे संसद की मंजूरी भी मिल जाएगी।

यह संशोधन लागू होने के बाद जौनसारी युवाओं को सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लाभ लेने में आ रही समस्याओं से बड़ी राहत मिलेगी। लंबे समय से यह त्रुटि युवाओं के भविष्य के रास्ते में एक बड़ी बाधा बन रही थी।

इस मुद्दे को उठाने और न्यायालय तक पहुंचाने में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधू चौहान की अहम भूमिका रही है। उनके प्रयासों और पहल के कारण यह मामला सरकार और न्यायपालिका के स्तर पर गंभीरता से लिया गया। अब उनके प्रयास रंग लाते दिखाई दे रहे हैं।

जौनसार-बावर क्षेत्र के लोगों का मानना है कि यह सिर्फ एक शब्द का संशोधन नहीं, बल्कि उनकी पहचान और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। यदि संसद से इसे जल्द मंजूरी मिलती है तो यह जौनसारी समाज के लिए एक ऐतिहासिक सुधार साबित होगा।

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