हरिद्वार जेल क्वार्टर: समय सीमा से पहले बिड खोलने का आरोप, विजिलेंस जांच की मांग।

ब्यूरों रिपोर्ट
देहरादून/हरिद्वार।
हरिद्वार जिला जेल परिसर में प्रस्तावित रेजिडेंस क्वार्टर निर्माण से जुड़े टेंडर प्रोसेस पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में उत्तराखंड की सरकारी निर्माण एजेंसी (BRIDCUL) के अधिकारियों पर टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करने के आरोप लगे हैं। मामले को लेकर राज्य विजिलेंस आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कर तत्काल जांच की मांग की गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि BRIDCUL द्वारा मेमोरेंडम नंबर 298/BRIDCUL-1041/26 (दिनांक 13 फरवरी 2026) के तहत “डिस्ट्रिक्ट जेल कैंपस हरिद्वार में रेजिडेंस क्वार्टर निर्माण (सिविल वर्क)” के लिए जारी टेंडर में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
तय तारीख से पहले ही खोल दी गईं बिड…
नोटिस इनवाइटिंग टेंडर (NIT) के अनुसार टेंडर फीस, अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) और अन्य दस्तावेजों की फिजिकल सबमिशन की अंतिम तारीख 6 मार्च 2026 तय की गई थी।
लेकिन शिकायत के अनुसार टेंडर कमेटी ने 28 फरवरी 2026 को ही बिड खोल दी और चार प्रतिभागियों में से दो को “रिस्पॉन्सिव” तथा दो को “नॉन-रिस्पॉन्सिव” घोषित कर दिया।
गंभीर आरोप यह भी है कि टेंडर फीस और EMD की हार्ड कॉपी प्राप्त किए बिना ही बिड का मूल्यांकन कर लिया गया, जो पूरी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
किन नियमों के उल्लंघन का आरोप…..
शिकायत में कहा गया है कि यह कार्रवाई कई महत्वपूर्ण नियमों के सीधे उल्लंघन के दायरे में आती है, जिनमें शामिल हैं,
General Financial Rules 2017 के रूल 160 और 161 – पब्लिक प्रोक्योरमेंट में पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करने से जुड़े प्रावधान।
रूल 173 (xii) – सभी बिड्स को तय समय सीमा के बाद ही खोलने की अनिवार्यता।
Central Vigilance Commission की टेंडरिंग गाइडलाइंस – समय से पहले बिड खोलने पर स्पष्ट रोक।
Uttarakhand Procurement Rules 2017 – EMD और टेंडर फीस के सत्यापन के बाद ही मूल्यांकन का प्रावधान।
‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ पर भी सवाल….
शिकायत में कहा गया है कि तय समय सीमा से पहले बिड खोलना भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समान अवसर के सिद्धांत का भी उल्लंघन है।
ऐसी कार्रवाई से,
प्रतियोगिता की निष्पक्षता प्रभावित होती है
पारदर्शिता कमजोर पड़ती है
मनमानी और पक्षपात की आशंका पैदा होती है
पहले भी ऐसे आरोप?……
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि इसी टेंडर कमेटी द्वारा पहले भी संभाले गए कुछ टेंडरों में इसी तरह की प्रक्रियागत गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिससे यह मामला एक “सिस्टमेटिक पैटर्न” की ओर इशारा करता है।
विजिलेंस जांच की मांग……
शिकायतकर्ता ने राज्य के Uttarakhand Vigilance Commission से मांग की है कि,
पूरे टेंडर प्रोसेस की स्वतंत्र विजिलेंस जांच कराई जाए
टेंडर फाइल, नोटिंग शीट और बिड ओपनिंग रिकॉर्ड सुरक्षित कर जांच की जाए
नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए
भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं
सवालों के घेरे में टेंडर प्रक्रिया……
हरिद्वार जेल परिसर में बनने वाले आवासीय क्वार्टर का यह प्रोजेक्ट सरकारी खर्च से जुड़ा है। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन बेहद अहम माना जाता है।
अगर शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला सरकारी ठेकों की प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
