“विस्थापितों का हक या इंतज़ार? कृषि मजदूरी पर सरकार से सीधा सवाल”
ब्यूरों रिपोर्ट, देहरादून
लखवाड़ बांध विस्थापित श्रम सहकारी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने सचिवालय में मुख्य सचिव आनन्द बर्धन से मुलाकात कर राज्य में कृषि मजदूरी दरों को बढ़ाने की जोरदार मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 के लिए कृषि मजदूरी दर 515, 470 और 465 रुपये प्रतिदिन निर्धारित करते हुए शासनादेश जारी कर दिया है, लेकिन उत्तराखंड में वर्ष 2015 के बाद से कृषि मजदूरी का पुनरीक्षण नहीं किया गया है।
दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट कहा कि मजदूरी दरों में संशोधन न होने के कारण कृषि क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों को सरकारी योजनाओं के तहत बढ़ी हुई मजदूरी का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका सबसे अधिक असर लखवाड़ बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों पर पड़ रहा है, जो पहले से ही विस्थापन की मार झेल रहे हैं।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि वर्ष 2015 के शासनादेश में संशोधन कर केंद्र द्वारा निर्धारित नई कृषि मजदूरी दरों को उत्तराखंड में भी लागू किया जाए, ताकि मजदूरों को उनका वाजिब हक मिल सके।
मुख्य सचिव आनन्द बर्धन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए श्रम विभाग के सचिव को लिखित निर्देश जारी कर उचित कार्रवाई करने को कहा है।
लखवाड़ बांध विस्थापितों ने इस सकारात्मक पहल के लिए मुख्य सचिव का आभार व्यक्त किया है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही मजदूरों को बढ़ी हुई दरों का लाभ मिलेगा।