दरभंगा की रैली का सच, क्या यही है विपक्ष की राजनीति?…

ब्यूरों रिपोर्ट, [विक्रम सिंह]
बिहार के दरभंगा ज़िले में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान कांग्रेस और आरजेडी की साझा रैली ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वजह बनी कोई बड़ी घोषणा या मुद्दों पर गहन बहस नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत माता के लिए खुलेआम अपशब्दों का इस्तेमाल।
क्या हुआ दरभंगा में?….
28 अगस्त को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और तेजस्वी यादव की मौजूदगी में एक विशाल सभा आयोजित हुई। इसी कार्यक्रम के दौरान सामने आए एक वीडियो में कुछ लोग प्रधानमंत्री मोदी की मां के खिलाफ अपशब्द कहते सुनाई दिए।
वीडियो में यह भी सुनाई देता है कि कोई व्यक्ति तुरंत टोकते हुए कहता है – “ये गलत है।”
लेकिन, नुकसान हो चुका था। विपक्ष की सबसे बड़ी सभा में इस तरह की अभद्रता ने राजनीतिक विमर्श को शर्मसार कर दिया।
मंच कौन सा था?……
कांग्रेस और सहयोगी दलों का दावा है कि अपशब्द मुख्य मंच से नहीं बल्कि एक अलग स्वागत मंच से बोले गए।
राहुल, प्रियंका और तेजस्वी उस वक्त मुख्य मंच पर थे।
फिर भी, यह पूरा आयोजन इन्हीं नेताओं का था और भीड़ इन्हीं के बुलावे पर जुटी थी। इसलिए जनता यह सवाल पूछ रही है कि क्या आयोजन की ज़िम्मेदारी से इन नेताओं को अलग किया जा सकता है?
विपक्ष की असली छवि…..।
विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर लोकतंत्र बचाने, संविधान की रक्षा और जन अधिकारों की बात करता है। लेकिन जब उनकी ही रैली में प्रधानमंत्री की दिवंगत माता के लिए अपशब्द बोले जाएँ, तो यह संदेश जाता है कि विपक्ष के पास जनता के मुद्दे नहीं, बल्कि घृणा और अपमान की राजनीति ही बची है।
क्या यह वही “नई राजनीति” है जिसका दावा विपक्ष करता है?
क्या जनता ऐसी भाषा और ऐसे कार्यक्रम को स्वीकार करेगी?
बीजेपी का पलटवार….।
भाजपा ने तुरंत इस घटना को विपक्ष के चरित्र का आईना बताते हुए कड़ी निंदा की। पार्टी का कहना है कि यह “इंडिया गठबंधन” का असली चेहरा है, जो मोदी से नफ़रत में इतना अंधा हो चुका है कि दिवंगत माता तक को नहीं छोड़ता।
कांग्रेस का बचाव…..।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि घटना मुख्य मंच पर नहीं हुई और वीडियो भी एडिटेड हो सकता है। मगर सवाल यह है कि इतने बड़े राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में अनुशासन और जिम्मेदारी किसकी थी? क्या जनता सिर्फ़ “यह मंच हमारा नहीं था” सुनकर संतुष्ट हो जाएगी?
जनता के लिए सबक….।
यह घटना देशवासियों के लिए आंख खोलने वाली है। जब विपक्ष सत्ता में नहीं है तब उनके समर्थक इस हद तक गिर सकते हैं, तो सत्ता मिलने पर क्या होगा?
जनता को यह सोचना होगा।
क्या वह अपने नेताओं से मुद्दों पर बहस, समाधान और विज़न चाहती है,
या फिर सिर्फ़ कटु भाषा, गाली-गलौज और व्यक्तिगत हमले?
दरभंगा की घटना ने साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करते-करते विपक्ष अब संस्कार और शिष्टाचार की सीमा लांघ चुका है।
आज ज़रूरत है कि देश की जनता यह तय करे कि वह विकास की राजनीति चाहती है या अपमान और नकारात्मकता की राजनीति।