हरबर्टपुर में कूड़ा ठेका घोटाले की बू: एक ही फर्म को फायदा, फर्जी निविदाओं से खेल?

ब्यूरों रिपोर्ट
हरबर्टपुर। नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला वार्ड नं. 01 बंशीपुर में बनाए गए अस्थाई कूड़ा डम्पिंग स्थल से कूड़ा उठान के ठेके में गंभीर अनियमितताओं का सामने आया है।
निविदा प्रक्रिया पर उठे बड़े सवाल….
सूत्रों के अनुसार, कूड़ा उठान के लिए तीन फर्मों से कोटेशन/निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें से केवल एक फर्म मै० रिद्धि सिद्धि कॉन्ट्रेक्टर एंड सप्लायर ही सभी शर्तों पर खरी उतरी।
बाकी दो फर्मों की निविदाएं न सिर्फ बिना हस्ताक्षर के थीं, बल्कि उनके साथ संलग्न शपथपत्र भी अधूरे और बिना हस्ताक्षर के पाए गए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ये फर्में केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए डाली गई थीं?
आरोप यह भी है कि पूरी प्रक्रिया में मिलीभगत और साठगांठ के जरिए एक ही फर्म को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। हैरानी की बात यह है कि संबंधित फर्म को बिना विधिवत अनुबंध के ही कार्यादेश जारी कर दिया गया।
जेसीबी के नाम पर ‘खेल’? बिलों में बढ़े घंटे, बढ़ा भुगतान….।
मामला यहीं नहीं थमता। बंशीपुर डम्पिंग साइट से कूड़ा उठान के लिए उपयोग की गई जेसीबी मशीन के घंटों को लेकर भी बड़ा खेल सामने आया है।
आरोप है कि,
जेसीबी के अधिक घंटे दिखाकर बिल बनाए गए।
जबकि अनुबंध में जेसीबी से कूड़ा एकत्रीकरण की कोई शर्त ही नहीं थी।
इसके बावजूद भारी भुगतान कर सरकारी धन की बंदरबांट की गई।
पारदर्शिता पर सवाल, जांच की मांग तेज….।
इन खुलासों के बाद स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर,
बिना हस्ताक्षर वाली निविदाएं कैसे स्वीकार की गईं?
बिना अनुबंध के कार्यादेश क्यों जारी हुआ?
और जेसीबी के नाम पर अतिरिक्त भुगतान किसके इशारे पर हुआ?
अब जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि जनता के पैसे की हो रही इस कथित लूट पर रोक लग सके।