उत्तराखंड

“राहुल गांधी की नागरिकता” मामला: क्या सच, क्या सियासत?

ब्यूरो रिपोर्ट

Rahul Gandhi की कथित ब्रिटिश/दोहरी नागरिकता को लेकर एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मामला इस समय Allahabad High Court Lucknow Bench में विचाराधीन है। लेकिन जो बातें सोशल मीडिया और कुछ मीडिया में चल रही हैं, उनका सच थोड़ा अलग है।

मामला क्या है?…

यह विवाद नया नहीं है, बल्कि करीब 10 साल पुराना है।
साल 2015 में Subramanian Swamy ने आरोप लगाया था कि,

एक यूके की कंपनी Backops Ltd. के दस्तावेजों में राहुल गांधी ने खुद को “ब्रिटिश नागरिक” बताया था।

इसी आधार पर FIR की मांग की गई थी, लेकिन निचली अदालत (मजिस्ट्रेट) ने FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया।

अब उसी फैसले को बीजेपी कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

हाईकोर्ट में अभी क्या हुआ?…..

हाल की सुनवाई में कुछ अहम बातें सामने आईं है।

1. सरकार को बुलाया गया।

9 मार्च 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) को आदेश दिया कि
2019 का पूरा रिकॉर्ड कोर्ट में पेश किया जाए।

2- MHA ने क्या दिया?…..

Ministry of Home Affairs India (MHA) के अधिकारियों ने 20 मार्च को कोर्ट में पेश होकर

29 अप्रैल 2019 का पुराना नोटिस दिखाया।

यह नोटिस राहुल गांधी को भेजा गया था।

इसमें सिर्फ उनसे “तथ्यात्मक स्थिति” (factual position) स्पष्ट करने को कहा गया था।

महत्वपूर्ण बात,
यह कोई जांच रिपोर्ट या अंतिम फैसला नहीं था।

3. दस्तावेज कैसे पेश हुए?…

रिकॉर्ड बंद लिफाफे में कोर्ट को दिए गए।

सुनवाई जज के चैंबर में हुई (गोपनीय रूप से)

कोर्ट ने दस्तावेज देखे और फिर वापस कर दिए।

केंद्र सरकार को इस केस में पक्षकार बनने की अनुमति दे दी गई।

सबसे जरूरी बात: क्या “नागरिकता का सबूत” दिया गया?….

नहीं

MHA ने कोई ऐसा दस्तावेज नहीं दिया जिससे साबित हो कि,

राहुल गांधी सिर्फ भारतीय नागरिक हैं।

या ब्रिटिश नागरिक हैं।

यानी अभी तक कोई निर्णायक प्रमाण कोर्ट में पेश नहीं हुआ है।

कोर्ट ने क्या फैसला दिया?….

अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।

कोर्ट ने न तो राहुल गांधी की नागरिकता पर टिप्पणी की

न ही कोई निष्कर्ष निकाला।

मामला अभी सिर्फ “admission stage” पर है
(यानी कोर्ट यह तय कर रहा है कि केस आगे चलेगा या नहीं)

आगे क्या?……

मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को होगी।

आसान भाषा में समझें…….

मामला पुराना है, नया नहीं।

सरकार ने सिर्फ पुराना नोटिस और रिकॉर्ड दिया है।

कोई जांच रिपोर्ट या नागरिकता का सबूत नहीं आया।

कोर्ट ने अभी कोई फैसला नहीं दिया है

यह मामला फिलहाल कानूनी प्रक्रिया के शुरुआती चरण में है।
सोशल मीडिया पर जो “पक्के दावे” किए जा रहे हैं, वे अभी कोर्ट में साबित नहीं हुए हैं।

इसलिए इसे अभी “आरोप और जांच का मामला” ही समझें, न कि कोई तय सच।

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