मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड की बिगड़ती कानून व्यवस्था….!
ब्यूरों रिपोर्ट…..
उत्तराखंड—जिसे देवभूमि कहा जाता है। आज अपराध, असुरक्षा और भय के माहौल में सांस ले रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल अब केवल विपक्ष नहीं, बल्कि आम जनता भी उठा रही है।
पिछले एक महीने में देहरादून समेत उत्तराखंड के कई जिलों में हत्या, गोलीकांड, महिलाओं के खिलाफ अपराध, नस्ली हिंसा और सामाजिक तनाव की घटनाओं ने सरकार के “सुशासन” के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
सवाल साफ है कि,
क्या उत्तराखंड में कानून व्यवस्था ढह चुकी है?
राजधानी देहरादून: अपराध का खुला खेल…….
देहरादून, जो कभी शांत और सुरक्षित शहर माना जाता था, आज अपराध की राजधानी बनता जा रहा है।
दिनदहाड़े गोलीकांड — तिब्बती मार्केट…..
आज देहरादून के तिब्बती मार्केट में एक युवक को दिनदहाड़े गोली मार दी गई।
भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई इस घटना ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल,
जब राजधानी के सबसे व्यस्त बाजार में अपराधी बेखौफ होकर गोली चला सकते हैं, तो आम नागरिक कितने सुरक्षित हैं?
युवती की हत्या — गला रेतकर हत्या…….
सप्ताह भर पहले देहरादून में एक लड़की की गला रेतकर हत्या कर दी गई।
यह घटना केवल अपराध नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था पर सीधा हमला है।
सवाल:
क्या उत्तराखंड में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं?
युवती की हत्या – विकासनगर…….
विकासनगर क्षेत्र में 18 वर्षीय युवती की हत्या ने पूरे जिले को झकझोर दिया।
हैरानी की बात यह रही कि आरोप परिवार से जुड़े व्यक्ति पर लगे।
सवाल:
जब रिश्ते ही सुरक्षित नहीं, तो कानून व्यवस्था का भरोसा कैसे किया जाए?
पूर्वोत्तर छात्र की हत्या- “मैं भारतीय हूं”……
त्रिपुरा के MBA छात्र की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया।
सवाल:
क्या उत्तराखंड में बाहरी नागरिक और छात्र सुरक्षित नहीं हैं?
एक महीने में अपराधों की बाढ़
पिछले एक महीने में सामने आई प्रमुख घटनाएं…
देहरादून जिले में:
दिनदहाड़े गोलीकांड
गला रेतकर हत्या
युवतियों की हत्या
नस्ली हिंसा
महिलाओं के खिलाफ अपराध
सड़क हिंसा और गैंग विवाद
भूमि और खनन विवाद से जुड़े हिंसक मामले
अन्य जिलों में:
हरिद्वार में कानून व्यवस्था को लेकर विरोध
सामाजिक तनाव और साम्प्रदायिक घटनाएं
पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता के आरोप
सच्चाई यह है कि,
सिर्फ एक महीने में उत्तराखंड में गंभीर अपराधों की संख्या दर्जनों तक पहुंच चुकी है।
सिस्टम फेल या सरकार फेल?……
जब अपराध बढ़ते हैं, तो सवाल सिर्फ अपराधियों पर नहीं, बल्कि सरकार पर उठते हैं।
क्या मुख्यमंत्री धामी की सरकार अपराधियों में डर पैदा करने में असफल रही?
क्या पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है?
क्या कानून व्यवस्था सिर्फ कागजों और बयानबाजी तक सीमित रह गई है?
क्या उत्तराखंड अपराधियों के लिए सुरक्षित और आम जनता के लिए असुरक्षित राज्य बन गया है?
हैरानी की बात यह है कि खुद पुलिस मुख्यालय को कानून व्यवस्था पर हाई-लेवल समीक्षा करनी पड़ी।
यह संकेत है कि हालात सामान्य नहीं हैं।
धामी सरकार के दावे बनाम जमीनी हकीकत……
सरकार कहती है कि,
“उत्तराखंड में कानून व्यवस्था बेहतर है।”
लेकिन सवाल यह है कि,
अगर व्यवस्था बेहतर है, तो हत्याएं क्यों बढ़ रही हैं?
अगर पुलिस सक्रिय है, तो अपराध क्यों नहीं रुक रहे?
अगर सरकार मजबूत है, तो जनता में डर क्यों है?
“पहाड़ का सच” का सवाल…
उत्तराखंड की जनता जानना चाहती है कि,
क्या मुख्यमंत्री धामी प्रदेश की कानून व्यवस्था संभाल पाने में असफल हो चुके हैं?
क्या उत्तराखंड अपराधियों के लिए सुरक्षित और आम नागरिकों के लिए असुरक्षित राज्य बनता जा रहा है?
क्या सरकार अपराध रोकने की बजाय केवल बयानबाजी कर रही है?
अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में उत्तराखंड की पहचान देवभूमि नहीं, बल्कि अपराधभूमि बन जाएगी।