जब सच बोलने वाली ग़ायब हो जाए, तो सत्ता को जवाब देना होगा।
ब्यूरों रिपोर्ट
अंकिता भंडारी मर्डर केस में नए खुलासों से भाजपा में हलचल मचाने वाली अभिनेत्री उर्मिला सनावर अचानक सोमवार से लापता हैं।
न कोई बयान, न कोई वीडियो, न कोई सोशल मीडिया एक्टिविटी।
सवाल ये है, उर्मिला हैं कहां?……….
हरिद्वार पुलिस एक दिन पहले सहारनपुर पहुंचती है
घर पर नोटिस चस्पा होता है
घर कई दिनों से बंद है
4 दिन पहले आख़िरी FB लाइव होता है जिसमें उर्मिला ऑटो में बैठकर साफ़ कहती हैं।
“मेरी जान को खतरा है”
और उसके बाद… सन्नाटा।
ये महज़ इत्तेफ़ाक़ है?
या फिर “उर्मिला फाइल्स” को बंद करने की एक सोची-समझी कोशिश?….
जब एक महिला कलाकार, जो सत्ता से सवाल पूछ रही है, वो अचानक ग़ायब हो जाए।
और पुलिस उसे सुरक्षा देने के बजाय नोटिस देने पहुंचे।
तो सवाल उठेंगे, और ज़रूर उठेंगे।
क्या सरकार सच से डर रही है?
क्या पुलिस का इस्तेमाल डराने के लिए हो रहा है?
अगर उर्मिला सुरक्षित हैं, तो सरकार बताए वो हैं कहां?
उत्तराखंड में………..।
कांग्रेस सड़कों पर है।
लोग इंसाफ़ मांग रहे हैं,
अंकिता को न्याय की आवाज़ गूंज रही है
लेकिन,
भाजपा को न राज्य में फर्क पड़ रहा है
न केंद्र में कोई चिंता दिख रही है।
अगर उर्मिला को कुछ होता है,
तो इसकी सीधी ज़िम्मेदारी सत्ता और प्रशासन की होगी।
अब चुप्पी नहीं,
अब जवाब चाहिए।
उर्मिला को सामने लाओ,
सच को दबाया नहीं जा सकता।